भारत रत्न सचिन तेंदुलकर

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट जगत में सिर्फ दो ही युग याद रखे जायेंगे “Before Sachin Era” और “After Sachin Era” – प्रसिद्द क्रिकेट कमेंट्रेटर हर्षा भोगले

दुनिया में दो तरह के बल्लेबाज़ हैं, पहला सचिन तेंदुलकर, दूसरा बाकी सभी – “जिम्बाब्वे के सबसे सफल क्रिकेटर एंडी फ्लावर”

मैंने भगवान् को देखा है, वो टेस्ट मैचों में इंडिया की तरफ से नंबर चार पर बैटिंग करते हैं. – “ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज मैथ्यू हेडेन”

क्रिकेट क्या, सारे खेल जगत से भारत रत्न पाने वाले एकमात्र खिलाड़ी सचिन रमेश तेंदुलकर के बारे में उर्पयुक्त कही गई बातें ये सिद्ध करने के लिए काफ़ी हैं कि भारत में सचिन तेंदुलकर होने का अर्थ क्या है। कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा, की भारत में पूर्व से पश्चिम तक और उत्तर से दक्षिण तक हर भारतवासी को अगर कुछ जोड़ता है तो वो क्रिकेट का खेल ही है। कपिल देव और सुनील गावस्कर के युग से हर भारतीय के दिल में आरम्भ हुआ वो सपना कि पूरे विश्व क्रिकेट में कब कोई भारतीय सितारा अपना परचम लहराएगा, ‘सचिन तेंदुलकर युग’ के आने के बाद पूरी तरह सच हो गया था। अपने 24 वर्ष के क्रिकेट करियर में, सचिन रमेश तेंदुलकर ने हर भारतीय का सर अनगिनत बार गर्व से ऊँचा करवाया है। भावनाओं में बहते हुए अनेकानेक लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया कि भारत माता के इस सच्चे सपूत को भारत रत्न देने से कहीं ना कहीं भारत रत्न का भी मान बढ़ा है|

अपने विदाई भाषण में हर उस व्यक्ति जिसने उन्हें यहाँ तक पहुंचने में सहयोग किया के बारे में इस महान प्लेयर ने क्रिकेट के मैदान से जो कुछ भी कहा उसे सुनने के बाद पूरी तरह से से ये साबित हो गया कि भारत के 125 करोड लोग अगर आज सचिन को प्यार करते हैं और भगवान की तरह पूजते हैं तो वह पूरी तरह से सही है क्योंकि इस सम्मान औऱ प्यार का 5 फिट और 5 इंच का यह व्यक्ति पूरा हकदार है।

दौलत, शौहरत तो बहुत लोग कमा लेते हैं लेकिन इज्जत कमाना हर किसी के बस में नहीं होता है इज्जत पाने के लिए इंसान को कई कठिन कर्तव्यों का पालन करना होता है जो कि सचिन ने पिछले 24 साल से क्रिकेट और देश के लिए किया है।

जीवन परिचय

राजापुर के मराठी ब्राह्मण परिवार में जन्मे सचिन का नाम उनके पिता रमेश तेंदुलकर ने अपने चहेते संगीतकार सचिन देव बर्मन के नाम पर रखा था। उनके बड़े भाई अजीत तेंदुलकर ने उन्हें क्रिकेट खेलने के लिये प्रोत्साहित किया था। सचिन के एक भाई नितिन तेंदुलकर और एक बहन सविताई तेंदुलकर भी हैं। १९९५ में सचिन तेंदुलकर का विवाह अंजलि तेंदुलकर से हुआ। सचिन के दो बच्चे हैं – सारा और अर्जुन।

सामान्य परिवार में बढे हुये सचिन ने अपनी शिक्षा मुंबई के शारदाश्रम विश्वविद्यालय में की. उनके भाई अजित तेंदुलकर इन्होंने बचपन में ही सचिन के अंदर के क्रिकेटर को पहचानकर उन्हें सही से मार्गदर्शन किया. क्रिकेट के ‘द्रोणाचार्य’ रमाकांत आचरेकर ने सचिन को सक्षम शिक्षा दी. हँरिस शिल्ड मुकाबले में विनोद कांबली के साथ निजी 326 रन करते हुये 664 रनों की विक्रमी भागीदारी करने का पराक्रम किया और 15 साल की उम्र में वो मुंबई टीम में शामिल हुये|

अपने पिता के द्धारा कहा गया ये वाक्य, कि एक अभिभावक के रूप में “सचिन एक अच्छा इंसान है” ये सुनना ज्यादा गर्व की बात है, बजाय इसके कि “सचिन एक अच्छा क्रिकेटर है” ने हमेशा ही सचिन के जीवन आचरण में उच्चतम प्रेरणा का काम किया है | सचिन के शब्दों में “हर बार जब मैंने कुछ विशेष किया है और अपना बल्ला दिखाया है तो वो मेरे पिता के लिए था.”। माता-पिता के लिए इतना सम्मान आज की पीढ़ी के नौजवानों के लिए बहुत ही प्रेरणाप्रद है।

परिवार

सचिन के पिता, रमेश तेंदुलकर एक मराठी कवि और प्रोफेसर थे, जबकि उनकी माँ, रजनी ने लाइफ कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया में काम किया था। “मानवतावादी सोच” और “सरलता”, सचिन को अपने माँ-बाबा से विरासत में मिली थी। अपनी माँ के हाथ का बना “बैंगन भर्ता” और “वरन भात” आज भी सचिन का पसंदीदा खाना है।

अपने भाई अजीत जो उनसे उम्र मैं 10 वर्ष बड़े हैं, को अपना सबसे अच्छा आलोचक और दोस्त मानने वाले सचिन का कहना है कि अजीत ने, जो खुद भी बहुत अच्छे क्लब क्रिकेटर थे ने अपने करियर का त्याग कर दिया ताकि वो सचिन के करियर पर ध्यान दे सकें।

अपने सबसे बड़े भाई नितिन के बारे में सचिन का कहना है कि सभी भाइयों बहनों में वो सबसे ज्यादा क्रिएटिव हैं। वर्तमान में वो एक लेखक और कवि हैं।

बहन सविता, जिन्होंने सचिन को उनका पहला कश्मीरी विलो का बैट दिए था, सचिन के काफी करीब थीं। उनकी बात याद सचिन कहते हैं, की उनकी शादी के वक़्त वो हमेशा अपने परिवार मैं जिद्द करते रहे कि शादी के बाद सविता के पति, उन सबके साथ ही आ के रहें, जिससे उनकी बहन को घर छोड़ के ना जाना पड़े।

सचिन मानते हैं कि उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल 1991 में आया जब उनकी जिंदंगी में अंजलि पत्नी बनकर आयी। अंजलि डॉक्टर थी लेकिन सचिन के क्रिकेट की वजह से और बच्चों के लिए अंजलि ने अपने करियर को छोड़ दिया। सचिन के शब्दों में “अंजलि ने परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली और मुझे आजाद कर दिया देश और दुनिया घूमकर क्रिकेट खेलने के लिए। मैं समझता हूं कि अगर अंजलि नहीं होतीं तो मेरा करियर ऐसा नहीं होता।”

क्रिकेट की शुरुआत

सचिन ने शारदाश्रम विद्यामंदिर में अपनी शिक्षा ग्रहण की। तेज़ गेंदबाज़ बनने के लिये उन्होंने एम.आर.एफ. पेस फाउंडेशन के अभ्यास कार्यक्रम में शिरकत की। पर वहाँ तेज़ गेंदबाज़ी के कोच डेनिस लिली ने उन्हें पूर्ण रूप से अपनी बल्लेबाज़ी पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। रमाकांत आचरेकर के निर्देशन में अल्पायु में ही क्रिकेट खेलना शुरू करके तेंदुलकर ने 1988 में स्कूल के एक हॅरिस शील्ड मॅच में विनोद कांबली के साथ खेलते हुए 664 रन की भागीदारी बनाकर स्कूल क्रिकेट में विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। इस धमाकेदार जोडी के अद्वितीय प्रदर्शन के कारण एक गेंदबाज तो रो ही दिया और विरोधी पक्ष ने मैच आगे खेलने से इंकार कर दिया। सचिन ने इस मैच में 320 रन और प्रतियोगिता में हज़ार से भी ज़्यादा रन बनाये। युवाकाल में तेंदुलकर घंटों अपने कोच के साथ अभ्यास करते थे। उनके कोच स्टम्प्स पर एक रुपये का सिक्का रख देते, और जो गेंदबाज़ सचिन को आउट करता, वह् सिक्का उसी को मिलता था। और यदि सचिन बिना आउट हुये पूरे समय बल्लेबाज़ी करने में सफल हो जाते, तो ये सिक्का उन्हें मिलता था। सचिन के अनुसार उस समय उनके द्वारा जीते गये 13 सिक्के आज भी उन्हें सबसे ज़्यादा प्रिय हैं। सचिन ने अपना पहला प्रथम श्रेणी क्रिकेट मैच मुंबई के लिये 14 वर्ष की उम्र मे खेला।

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण

सचिन ने अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण 15 नवम्बर, 1989 को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कराची में किया तथा सचिन ने अपना पहला एकदिवसीय क्रिकेट मैच भी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 18 दिसम्बर 1989 को खेला। टेस्ट क्रिकेट में 51 शतक बनाकर उन्होंने सुनील गावस्कर, डॉन ब्रेडमैन और विवियन रिचडर्स जैसे क्रिकेट के पूर्व महारथियों के स्थापित कीर्तिमान तोड़ दिए। वह एकदिवसीय क्रिकेट में 18,000 से अधिक रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी हैं। वह दो बार भारतीय टीम के कप्तान बने। टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी तेंदुलकर ने 16 वर्ष की उम्र में 1989 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच में अपने क्रिकेट जीवन की शुरुआत की। अद्भुत बल्लेबाज़ी करते हुए 20वीं सदी के अंत तक लगभग 11 वर्षो के पेशेवर खेल जीवन में उन्होंने 54.84 रन का ख़ासा ऊँचा टेस्ट बल्लेबाज़ी औसत बनाए रखा, जो ग्रेग चैपल, विवियन रिचडर्स, जावेद मियांदाद, ब्रायन लारा और सुनील गावस्कर जैसे धुरंधरों के रन औसत से कहीं अधिक है। 5 फुट 5 इंच लंबे तेंदुलकर अपने क़द की कमी को अपने पैरों के फुर्तीलेपन से पूरा करते हैं। क्रिकेट इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में से एक सर डोनॉल्ड ब्रेडमैन ने तेंदुलकर की यह कहते हुए प्रशंसा की कि पिछले 50 वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले बेशुमार बल्लेबाज़ों में सिर्फ़ तेंदुलकर उनकी शैली के निकट पहुँच सके हैं।

सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट कभी अपने लिये नहीं खेला। वह हमेशा ही अपनी टीम के लिये या उससे भी ज्यादा अपने देश के लिये खेले। उनके मन में क्रिकेट के प्रति अत्यधिक सम्मान का भाव रहा। उन्होंने आवेश में आकर कभी कोई टिप्पणी नहीं की। किसी खिलाड़ी ने अगर उनके खिलाफ कभी कोई टिप्पणी की भी तो उन्होंने उस टिप्पणी का जवाब जुबान से देने के बजाय अपने बल्ले से ही दिया।

सचिन जब भी बल्लेबाजी के लिये उतरे, उन्होंने मैदान पर कदम रखने से पहले सूर्य देवता को नमन किया। क्रिकेट के प्रति उनके लगाव का अन्दाज़ इसी घटना से लगाया जा सकता है कि विश्व कप के दौरान जब उनके पिताजी का निधन हुआ उसकी सूचना मिलते ही वह घर आये, पिता की अन्त्येष्टि में शामिल हुए और वापस लौट गये। उसके बाद सचिन अगले मैच में खेलने उतरे और शतक ठोककर अपने दिवंगत पिता को श्रद्धांजलि दी।

अच्छा क्रिकेट खेलने के लिये ऊँचे कद को वरीयता दी जाती है लेकिन छोटे कद के बावजूद लम्बे-लम्बे छक्के मारना और बाल को सही दिशा में भेजने की कला के कारण दर्शकों ने उन्हें लिटिल मास्टर का खिताब दिया जो बाद में सचिन के नाम का ही पर्यायवाची बन गया।

मैं भी सचिन के उन करोड़ों प्रशंसकों में से एक हूँ, जिन्होंने, सचिन के 24 साल के करियर को, हर उतार चढाव को, अपनी तरह ही जिया है। करोड़ों भारतवासियों की तरह मैं भी ये मानता हूँ कि हम प्रशंसकों के लिए भारतीय क्रिकेट के हमेशा दो युग होंगे, “सचिन के पहले का युग” और “सचिन के बाद का युग”। सचिन के बारे में वैसे तो बहुत कुछ जानने और सुनने को मिल जायेगा, परन्तु सचिन एक ऐसे महान खिलाड़ी हैं , जिनके जीवन से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं . और आज मैं आपके सामने ऐसी ही 10 बातें रखना चाहूंगा।

  1. बड़ा सोचिये:

सचिन जब भारतीय टीम का हिस्सा नहीं थे तभी से वे लगातार भारत के लिए खेलने का सपना देखते थे| किसी भी क्रिकेटर के लिए यही सबसे बड़ी बात हो सकती है कि वो देश के लिए खेले और उसे जीत दिलाये| हमें भी अपने -अपने पसंद के छेत्र में जो सबसे बड़ा हो सकता है वो करने की सोचनी चाहिए और उसे पाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करनी चाहिए| सचिन ने खुद कहा भी है कि वो मानते हैं कि “सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है।”

  1. संतोष मत करिये:

सचिन आज तक इतने रिकार्ड्स बना चुके हैं कि उनकी अलग से एक रिकॉर्ड बुक बनायीं जा सकती है| सचिन रनो के अम्बार पर खड़े होकर भी हमेशा रनो के लिए भूखे दिखे, उन्होंने कभी संतोष नहीं किया और दिन प्रतिदिन नए रिकार्ड्स बनाते चले गए|

ज्यादातर लोग कुछ बड़ी उपलब्धि प्राप्त करने के बाद संतुष्ट हो जाते हैं कि चलो मैंने इतना बड़ा काम कर लिया, पर अगर सचिन से सीख ली जाए तो हमें खुद को हमेशा और प्रेरित करना चाहिए और अपनी क्षमता को बढ़ाते हुए नयी उपलब्धियां हासिल करनी चाहिए।

  1. अपना ध्यान केंद्रित रखिये:

सचिन ने लगातार 24 सालों तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेली है| ये करना बिना 100% एकाग्रता के असम्भव है| सचिन मीडिया की आँखों का तारा होने के बावजूद कभी क्रिकेट से भटके नहीं| कभी उन्हें फिल्मों में काम करने के तो कभी राजनीति में आने के अनेकों प्रस्ताव मिले पर सचिन अपने दिमाग में बिलकुल साफ़ थे। चौबीस साल से उनका ध्यान बाइस गज की पिच पर ही था और इसलिए वे सर पर उम्मीदों का पहाड़ होते हुए भी किसी और क्रिकेटर से कहीं अधिक लम्बे समय तक और बेहतर खेल पाये|

अगर हम भी कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो हमें भी अपना ध्यान किसी एक चीज पर लम्बे समय तक केंद्रित रखना होगा।

  1. वापसी कीजिये:

हर खिलाडी या व्यक्ति के जीवन में बुरा दौर आता है, सचिन भी कई बार “आउट ऑफ़ फॉर्म” हुए हैं, तो कभी किसी चोट की वजह से टीम से बाहर बैठे हैं| पर हर बार उन्होंने वापसी की है।

मुझे याद है जनवरी’2006 में टाइम्स ऑफ़ इंडिया में बड़ी सी हेडलाइन आयी थी “ENDULKAR” जिसका मतलब था “सचिन का करियर ख़त्म हुआ” पर उसी अखबार को 24 फरवरी 2012 को एक नयी हेडलाइन देनी पड़ी…

“Sachin becomes first batsman to score 200 in an ODI”

हमें क्रिकेट के इस भगवान् से सीख लेनी चाहिए| कितनी ही बार हमारे जीवन में परेशानियां आती हैं और हम उनके सामने घुटने टेकने को तैयार हो जाते हैं, सचिन से सीख लेते हुए हमें भी तमाम मुश्किलों के बावजूद हर बार बाउंस – बैक करना चाहिए और अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए|

  1. कभी घमंड मत करिये:

मैं एक वीडियो देख रहा था, “भगवान जमीं पर”| उसमे एक बड़ी मजेदार बात कही गयी थी “सचिन ने इतने रिकार्ड्स बनाने के बाद भी कभी इतना attitude नहीं दिखाया जितना लोग उनके रिकार्ड्स याद कर के दिखा देते हैं|”

सचिन इतनी ऊंचाई पर पहुँच चुके हैं, फिर भी वो बिलकुल सामान्य तरह से ही रहते हैं। ऐसा उनके सारे करीबियों और और उनके साथी खिलाडियों का कहना है। ये आसान नहीं है|

हम रोज देखते हैं किस तरह से थोडा पैसा आने और मीडिया में थोड़ा से नाम मिलने से लोगों का दिमाग सातवें आसमान पर पहुँच जाता है पर सचिन तो सचिन हैं| शायद देश के सबसे बड़े आइकॉन होने के बाद भी वे इतने सामान्य और शांतचित्त हैं कि अपने आप ही उनके लिए मन में सम्मान पैदा हो जाता है| इसलिए, हमें भी कभी सफलता को अपने सर पर सवार नहीं होने देना चाहिए और नयी बुलंदियों को छूते हुए भी अपने पैर ज़मीन पर रखने चाहिएं|

  1. “टीम प्लेयर” बनिए:

सचिन अपने क्रिकेटिंग जीवन में कृष्णामचारी श्रीकांत से लेकर महेंद्र सिंह धोनी तक बहुत से कप्तानों के साथ खेले हैँ, और हर किसी के साथ उनका रिश्ता बहुत अच्छा रहा है। इतना बड़ा खिलाडी होने के बावजूद उनके साथ किसी तरह की अहम् नहीं देखने को मिला।

सचिन एक सम्पूर्ण टीम प्लेयर हैं जो अपने हितों से पहले टीम के हित को रखता है और जिसके लिए उसके स्वयं की प्रसिद्धि से कहीं ज़रूरी टीम की जीत है|

जब सुनील गावस्कर से पूछा गया कि सचिन को सबसे ज्यादा अफ़सोस किस बात का रहेगा तो उन्होंने कहा, “उस समय का जब सचिन ने रन बनाये और भारत हार गया और उस समय का जब सचिन ने रन नहीं बनाये और भारत हार गया”, इसी से पता चलता है कि सचिन किनते बड़े टीम प्लेयर थे और उनसे सीख लेते हुए हमें भी टीम प्लेयर की तरह काम करना चाहिए|

  1. अपनी कमियों को मानिये:

एक समय ऐसा आया जब सचिन को कप्तानी सौंपी गयी, पर कप्तान के रूप में वो अच्छा नहीं कर पा रहे थे| ऐसे में सचिन ने खुद को पीछे रखते हुए किसी और को कप्तान बनाया जाना उचित समझा| उन्होंने ये सब बड़ी सहजता के साथ किया और अपना ध्यान उसपर लगाया जो वो सबसे अच्छे ढंग से करते हैं – बल्लेबाजी|

पर कप्तान न होने के बावजूद वे एक अच्छे मार्गदर्शक बने रहे और साथी कप्तानों और खिलाडियों को अपने अनुभव के आधार पर हमेशा सलाह देते रहे|

ये एक सत्य है कि सबके अंदर कुछ कमियां होती हैं, ज़रूरी है उन्हें पहचानना और उनसे पार पाना| सचिन की तरह हमें भी अपनी कमियों को समझना चाहिए और उनका निवारण खोजना चाहिए|

  1. पुराने लोगों को मत भूलिए:

सचिन के गुरु श्री रमाकांत आचरेकर का बयान है कि, “सचिन उन्हें गुरु मानता है, ये सचिन की महानता है”

सचिन जब भी कोई सीरीज या टूनामेंट खेलने जाते थे तो उससे पहले अपने गुरु से ज़रूर मिलते थे और उनका आशीर्वाद लेते थे| इतने खिलाडी हैं देश में पर मैंने और किसी में अपने गुरु के लिए इतना सम्मान नहीं देखा। सच में सचिन महान हैं उनके अंदर भारतीय मूल्यों को समावेश साफ़ दीखता है|

सचिन सिर्फ अपने गुरु के लिए ही ऐसे नहीं हैं, वे आज भी अपने पुराने यार-मित्रों और साथी खिलाडियों के लिए वही पुराने सचिन हैं, और समय-समय पर उनकी मदद करते रहते हैं|

सचिन ने अपने विदाई भाषण में कहा भी, “दोस्तों के बिना ज़िन्दगी अधूरी है|”

हमें भी कामयाब होने के बाद उन लोगों को नहीं भूलना चाहिए जो कहीं न कहीं हमारे सफ़र का हिस्सा रहे हैं|

  1. अपने काम से अपना जवाब दीजिये:

सचिन पर ना जाने कितनी बार रिटायर होने का दवाब आया| कितनी ही बार आलोचकों ने उनके खेल में कमियां निकालीं और जो लोग क्रिकेट का ‘C’ भी नहीं जानते वो भी नसीहत देने में पीछे नहीं रहे. पर सचिन ने कभी भी आलोचकों को मुंह से जवाब नहीं दिया| वे हर बार मैदान पर गए और उनके बल्ले ने बात की|

आपके काम में भी ऐसा वक़्त आ सकता है जब चीजें आपके अनुकूल न हों, ऐसे में अपना आपा खोने और औरों को भला-बुरा कहने से बेहतर होगा कि सचिन की तरह हम भी अपने काम के ज़रिये लोगों का मुंह बंद करें।

  1. कुछ और बनने से पहले एक अच्छा इंसान बनिए:

सचिन को आज जो सम्मान, जो प्यार मिल रहा है, वो सिर्फ उनके खेल की वजह से नहीं है| सचिन एक महान खिलाड़ी होने के साथ–साथ एक बहुत अच्छे इंसान भी हैं| वो ऊँचे अधिकारीयों से लेकर सहायक कर्मचारियों तक को बराबर सम्मान देते हैं| कभी किसी विवादों में नहीं पड़ते और समय-समय पर सामजिक कार्यों में भी हिस्सा लेते रहे हैं। ये एक बहुत ही बड़ी बात है और हम सब को इसे अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

और अंत में

सचिन के विदाई भाषण की आखिरी पंक्ति में सचिन ने देश के सभी देशवासियों, स्टेडियम में मौजदू लोगों का शु्क्रिया अदा किया था और कहा था कि “मैं जानता हूँ और मैं कई लोगों से मिल चुका हूँ जो मेरे लिए व्रत रखते हैं, प्रार्थना करते हैं, मेरे लिए इतना कुछ किया है। उसके बिना मेरे लिए ज़िन्दगी ऐसी नहीं होती। मैं आपको ह्रदय से धन्यवाद देना चाहता हूँ| और ये भी कहना चाहूंगा कि वक़्त बहुत तेजी से गुजर गया है, लेकिन जो यादें आपने मेरे लिए छोड़ी हैं वो हमेशा-हमेशा के लिए मेरे साथ रहेंगी, खासतौर पर मेरे कानों में हमेशा एक आवाज गूंजती रहेगी.. सचिन, सचिन।

कुछ महत्वपूर्ण विश्व कीर्तिमान

  1. अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक करने वाले एकमात्र क्रिकेटर
  2. सबसे ज़्यादा वन डे मैच खेलने का रिकार्ड (463 मैच)
  3. वन डे मुक़ाबले में सबसे ज़्यादा रन (18,426 रन)
  4. वन डे मुक़ाबले में सबसे ज़्यादा 49 शतक
  5. वन डे क्रिकेट के इतिहास में दोहरा शतक लगाने वाले पहले क्रिकेटर
  6. वन डे क्रिकेट में सबसे ज़्यादा मैन ऑफ द सीरीज
  7. वन डे क्रिकेट में सबसे ज़्यादा मैन ऑफ द मैच
  8. विश्व कप क्रिकेट मुक़ाबलों में सबसे ज़्यादा रन
  9. विश्वकप में सबसे ज़्यादा शतक, अर्धशतक बनाने का रिकार्ड
  10. 1996 और 2003 विश्वकप में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज
  11. टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज़्यादा 51 शतक
  12. सबसे ज़्यादा टेस्ट मैच खेलने का रिकार्ड (200 मैच)
  13. टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रनों का कीर्तिमान (15,921 रन)
  14. टेस्ट क्रिकेट में 13,000, 14,000 और 15,000 रन बनाने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज़
  15. अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबलों (टेस्ट, वनडे एवं टी-ट्वेंटी) में सबसे ज़्यादा रन बनाने का कीर्तिमान (कुल 34,357 रन)
  16. एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में दोहरा शतक जड़ने वाले पहले खिलाड़ी बने।
  17. अन्तर्राष्ट्रीय मुक़ाबलो में सबसे ज्यादा ३०००० रन बनाने का कीर्तिमान.

राष्ट्रीय सम्मान

1) 1994 – अर्जुन पुरस्कार, खेल में उनके उत्कृष्ट उपलब्धि के सम्मान में भारत सरकार द्वारा

2) 1997-98 – राजीव गांधी खेल रत्न, खेल में उपलब्धि के लिए दिए गए भारत के सर्वोच्च सम्मान

3) 1999 – पद्मश्री, भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार

4) 2001 – महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार, महाराष्ट्र राज्य के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार

5) 2008 – पद्म विभूषण, भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार

6) 2014 – भारत रत्न, भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार

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